महफ़िल महफ़िल गाएंगे , सबको ये गीत सुनाएंगे,
आज दिल डूबा है कुछ यादों में, आंसुओं से आते हैं इन दो आँखों में...
बीते वो सारे पल ऐसे के चंद लम्हों में युग बीता हो जैसे,
कुछ किस्से हॅसने रुलाने के, वो किस्से बातें बनाने के...
कोई गुना से कोई सागर से, कोई रीवा कोई ग्वालियर से,
संग भोपालियों के तुम भी सुन लो यह बातें उन दिनों की, मुँह ज़बानी इस इन्दोरी से...
कभी डसते, कभी हॅसते, कभी पानी संग होली मचाते,
कभी किसी को पूछकर तो किसी की धुलाई, कर बार हमने बड़ी हद्द है मचाई..
याद आएँगे वो टिफ़िन मुझे, जिनके दम ये ज़िन्दगी कटी है मेरी,
जिनके दम कटेगा आगे ज़िन्दगी मेरी, याद आएँगे वो सुहाने दिन मुझे..
बीत गए ये ४ साल, भोपाल के कोने कपट छान मारने में ,
कभी किसी डैम के किनारे पे, तो कभी नई मार्केट /डी बी /१० नंबर के गलियारों में...
मुड़कर देखा जब इस बीते किस्से को, तोह मिली तारीख १३ अक्टूबर रखी सिरहाने को ,
कहने को दिन था वो कॉलेज का पहले, मैं कहता हूँ, दिन था वह नयी यादें जुटाने का पहला ..
वो डार्क रूम के झिलमिलाते रंग, वो फील्ड में मस्ती यारों के संग,
चूसते -थूकते बीत गए titration , समझे हम कैसे होता है लुब्रिकेशन ..
धुँधली हैं पर मीठी हैं , MCA ब्लॉक की यादें भी बड़ी सुहानी हैं,
कुर्सियों पे हो गोल घूमना , या पीछे बैठ dumbcharades खेलना ..
वो दिन टेरेस पे बंक लगाने के, वो दिन रैगिंग और खौफ खाने के,
वो फुँदरू हमारी यारी के नाम, वो ठुड्ढा उन दिनों के नाम...
Mood -i हो या भोजपुर हो, नाम जगह का जो भी हो...
जब धुन जमी है अपनी, तो जैसे सारे सुर सरगम में गाने लगे हो...
माना हर पल साथ ना थे, फिर भी हर पल साथ ही थे..
गम हो या ख़ुशी, धमाल हो या टेंशन, अरे हम सब साथ ही तो थे...
वो night-outs, वो लॉन्ग ड्राइव्स, वो बर्थडे बैशेस ,
वो हज़ारों की due ट्रीट्स , वो शर्तें, वो उधारी, वो काश, वो क्रशेस ...
वो तेरी, वो मेरी, ये तेरा, ये मेरा, ये अपना ये उसका,
थे तुम, थे हम , थी अदाएं, थी निशानियां, हैं खुशियां, हैं रुस्वाइयाँ....
रहेंगे हम, रहोगे तुम, रहेंगी यादें हमारी,
रोएंगे हम, रोओगे तुम, यादें जब सताएंगी हमें तुम्हारी और तुम्हे हमारी....
आज जब सब किस्सा ख़तम होने को है, जब कोई हमें भुलाने को है ,
कहता हूँ उस बेजान बेरहम बेदिल से, के ऐ यार असर अभी मेरी यारी का होने को है....
सोचा तुमने के यहीं छोड़ जाओगे हमें, सपनो का, ख्वाहिशों का वास्ता देकर भूल जाओगे हमें,
भूल कर गए भूल से इस लम्बे सफर में अकेले चलने का सोचकर, चल दिए जो आज तुम हमें यहाँ यहाँ अकेला छोड़कर...
महफ़िल महफ़िल गाएंगे, सबको ये गीत सुनाएंगे,
तुम्हारे दिल में हमारी यादें छोड़ जाएंगे, वादा है हम भी उन आँखों को कुछ आंसू दे जाएंगे...
आज दिल डूबा है कुछ यादों में, आंसुओं से आते हैं इन दो आँखों में...
बीते वो सारे पल ऐसे के चंद लम्हों में युग बीता हो जैसे,
कुछ किस्से हॅसने रुलाने के, वो किस्से बातें बनाने के...
कोई गुना से कोई सागर से, कोई रीवा कोई ग्वालियर से,
संग भोपालियों के तुम भी सुन लो यह बातें उन दिनों की, मुँह ज़बानी इस इन्दोरी से...
कभी डसते, कभी हॅसते, कभी पानी संग होली मचाते,
कभी किसी को पूछकर तो किसी की धुलाई, कर बार हमने बड़ी हद्द है मचाई..
याद आएँगे वो टिफ़िन मुझे, जिनके दम ये ज़िन्दगी कटी है मेरी,
जिनके दम कटेगा आगे ज़िन्दगी मेरी, याद आएँगे वो सुहाने दिन मुझे..
बीत गए ये ४ साल, भोपाल के कोने कपट छान मारने में ,
कभी किसी डैम के किनारे पे, तो कभी नई मार्केट /डी बी /१० नंबर के गलियारों में...
मुड़कर देखा जब इस बीते किस्से को, तोह मिली तारीख १३ अक्टूबर रखी सिरहाने को ,
कहने को दिन था वो कॉलेज का पहले, मैं कहता हूँ, दिन था वह नयी यादें जुटाने का पहला ..
वो डार्क रूम के झिलमिलाते रंग, वो फील्ड में मस्ती यारों के संग,
चूसते -थूकते बीत गए titration , समझे हम कैसे होता है लुब्रिकेशन ..
धुँधली हैं पर मीठी हैं , MCA ब्लॉक की यादें भी बड़ी सुहानी हैं,
कुर्सियों पे हो गोल घूमना , या पीछे बैठ dumbcharades खेलना ..
वो दिन टेरेस पे बंक लगाने के, वो दिन रैगिंग और खौफ खाने के,
वो फुँदरू हमारी यारी के नाम, वो ठुड्ढा उन दिनों के नाम...
Mood -i हो या भोजपुर हो, नाम जगह का जो भी हो...
जब धुन जमी है अपनी, तो जैसे सारे सुर सरगम में गाने लगे हो...
माना हर पल साथ ना थे, फिर भी हर पल साथ ही थे..
गम हो या ख़ुशी, धमाल हो या टेंशन, अरे हम सब साथ ही तो थे...
वो night-outs, वो लॉन्ग ड्राइव्स, वो बर्थडे बैशेस ,
वो हज़ारों की due ट्रीट्स , वो शर्तें, वो उधारी, वो काश, वो क्रशेस ...
वो तेरी, वो मेरी, ये तेरा, ये मेरा, ये अपना ये उसका,
थे तुम, थे हम , थी अदाएं, थी निशानियां, हैं खुशियां, हैं रुस्वाइयाँ....
रहेंगे हम, रहोगे तुम, रहेंगी यादें हमारी,
रोएंगे हम, रोओगे तुम, यादें जब सताएंगी हमें तुम्हारी और तुम्हे हमारी....
आज जब सब किस्सा ख़तम होने को है, जब कोई हमें भुलाने को है ,
कहता हूँ उस बेजान बेरहम बेदिल से, के ऐ यार असर अभी मेरी यारी का होने को है....
सोचा तुमने के यहीं छोड़ जाओगे हमें, सपनो का, ख्वाहिशों का वास्ता देकर भूल जाओगे हमें,
भूल कर गए भूल से इस लम्बे सफर में अकेले चलने का सोचकर, चल दिए जो आज तुम हमें यहाँ यहाँ अकेला छोड़कर...
महफ़िल महफ़िल गाएंगे, सबको ये गीत सुनाएंगे,
तुम्हारे दिल में हमारी यादें छोड़ जाएंगे, वादा है हम भी उन आँखों को कुछ आंसू दे जाएंगे...